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पिंजरा ढूंढता रहा सिस्टम, टूटती गई तेंदुए की सांसें

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बागपत। ककौर के यमुना खादर में शिकारी के खटके में फंसकर तो तेंदुआ बच निकला, लेकिन आधुनिक युग में सिस्टम की जुगाड़ तकनीक के चलते जीवन हार गया। बात एक दुर्लभ वन्यजीव की मौत की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की है जो आज भी जुगाड़ तकनीक के हाथों मोहताज है। जिसमें देर भी है और अंधेर भी है। भले ऐसा अक्सर न होता हो, लेकिन यही तो सवाल है कि आपात स्थिति के लिए हमारे पास क्या इंतजाम है? वन्य जीवों के विशेषज्ञ वन विभाग के लिए ऐसे अवसर आत्ममंथन के अवसर हैं, लेकिन सवाल वही है कि इससे कितना सबक ले पाएंगे?
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तेंदुए की मौत ने वन विभाग की बदइंतजामी और अदूरदर्शिता की कलई पूरी तरह खोलकर रख दी है। पहले तो वन विभाग की टीम कई घंटे की देरी से मौके पर पहुंची और वह भी महज एक जाल लेकर। फिर हड़बड़ाए वन विभाग को खपराना से ककौर तक पिंजरा लाने में ही आधा दिन बीत गया। इधर लापरवाही बढ़ रही थी और उधर तेंदुए की जान पर बन रही थी। दरअसल, तेंदुए की तलाश खपराना गांव के जंगल में हो रही थी। सरधना (मेरठ) से पिंजरा मंगाकर यहीं लगाया गया था, लेकिन वह मंगलवार सुबह ककौर में शिकारी के खटके में फंस गया। लोगों की भीड़ देखकर तेंदुआ खटके में छटपटा रहा था। वन रेंजर राजपाल सिंह स्वीकार करते हैं कि सूचना साढे़ नौ बजे मिली, लेकिन ग्रामीणों की मानें तो टीम करीब साढ़े 11 बजे पहुंची।
जाहिर है कि वन विभाग की टीम को पहुंचने में ही चार से पांच घंटे का समय खराब हुआ। ग्रामीणों की मदद से तेंदुए पर जाल फेंका गया और वनकर्मी और ग्रामीण लाठी डंडों से तेंदुआ को दबाकर बैठ गए। इसके बाद पिंजरे की तलाश शुरू हुई और तब तक तेंदुआ छटपटाता रहा। यदि समय रहते वन विभाग की टीम ने तत्परता दिखाई होती तो उसे बचाया जा सकता था। रेंजर का दावा है कि सूचना मिलने के बाद से लापरवाही नहीं बरती गई और टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर अभियान में जुटी। वन विभाग कोई भी तर्क दे, लेकिन इतना साफ है कि समय से वन विभाग सक्रिय नहीं हुआ।
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क्या है तेंदुए की मौत की वजह?
तेंदुआ की मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलेगी, लेकिन अंदेशा जताया जा रहा है कि उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। खटके में तेंदुआ का अगला पैर फंसा हुआ था। चार पांच घंटे तक वह इसी दशा में रहा और मौके पर जमा ग्रामीणों पर झपटने की कोशिश करता रहा। पैर खटके में फंसा था और बार-बार झपटने के कारण उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट पहुंची। यह भी अंदेशा है कि किसी ने ईंट या किसी डंडे से उसके ऊपर हमला कर दिया और इससे हड्डी टूट गई। तीसरा अंदेशा यह है कि अधिक देर तक दबाए रखने के कारण हड्डी टूट गई और दम घुट गया, इस कारण उसकी मौत हो गई।
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