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दो माह बीते, वारदात की कडिय़ां नहीं जोड़ पाई पुलिस

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दो माह बीते, वारदात की कड़ियां नहीं जोड़ पाई पुलिस
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बागपत। पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के करीब दो माह बीतने वाले हैं, लेकिन पुलिस वारदात की कड़ियों को भी नहीं जोड़ सकी है। बजरंगी की हत्या क्यों की गई, वारदात में कौन-कौन शामिल हैं और जिला जेल में पिस्टल कैसे पहुंचा। इन सब सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिल पाए। पुलिस आरोपियेां के बयान ले रही है, लेकिन अभी तक कोई महत्वपूर्ण क्लू हाथ नहीं लगा है।
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मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में नौ जुलाई को हत्या की गई थी। तत्कालीन जेलर यूपी सिंह समेत चार जेल अधिकारी और कर्मचारी निलंबित कर दिए गए। यूपी सिंह ने तन्हाई बैरक में बंद सुनील राठी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। वारदात में सबसे बड़ा सवाल था कि आखिर सुनील राठी ने मुन्ना बजरंगी की हत्या क्यों की। रंजिश, सुपारी या अपराध की दुनिया में वर्चस्व की जंग वजह रही। वारदात की साजिश कब और किस-किसने रची। क्या सुनील राठी सिर्फ मोहरा है या हत्या एक सियासी षड्यंत्र है। हत्या की वजह और वारदात में शामिल लोगों का पता लगाना तो दूर पुलिस अभी तक यह भी ठोस जानकारी नहीं जुटा पाई है कि जेल में पिस्टल कैसे पहुंचा। सुनील राठी ने कहा था कि बजरंगी ही पिस्टल लेकर पहुंचा, जबकि पुलिस ने इस बयान को भ्रमित करने वाला ही माना था। पुलिस को यह भी भनक लगी थी कि राठी के पास बागपत जेल में पहले दिन से ही पिस्टल था। पुलिस किसी भी उलझे हुए सवाल का जवाब नहीं ढूंढ़ सकी है।
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