बागपत। मुन्ना बजरंगी की हत्या में पुलिस को देरी से भनक लगी। जेल में चल रहे मोबाइलों के माध्यम से कई लोगों को पहले ही जानकारी मिल गई थी। पुलिस को देरी से जानकारी मिली। सर्विलांस से ऐसे नंबरों का भी खुलासा हो रहा है, जिन्हें हत्या के बाद से जेल से सूचनाएं दी।
मुन्ना बजरंगी की हत्या में पुलिस की रफ्तार बेहद धीमी रही। वारदात के बाद जेल प्रशासन की ओर से ही देरी से सूचना पुलिस तक पहुंची। पुलिस को जब तक भनक लगती है, उससे पहले ही व्हाट्स एप के माध्यम से लोगों तक सूचना पहुंचनी शुरू हो गई। हत्या सवा छह बजे हुई और जेल से बाहर करीब साढे़ छह बजे ही सूचना पहुंचने लगी। जबकि खेकड़ा थाने को मामले की जानकारी साढे़ सात बजे मिली। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार और एसपी जयप्रकाश भी करीब आठ बजे जिला कारागार पहुंचे। जेल में बंद बंदी लगातार जेल से बाहर के परिचितों को हत्या की जानकारी दे रहे थे।
सवा घंटे बाद दी थी थाने में हत्या की सूचना
बागपत। मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जेल प्रशासन पूरी तरह गफलत में था। पुलिस का रिकॉर्ड बताता है कि हत्या सुबह सवा छह बजे हुई और खेकड़ा थाने में प्राथमिक सूचना साढे़ सात बजे दर्ज कराई गई। इसी बड़ी वारदात में आखिर संबंधित थाने में सूचना देर से क्यों दी।
बागपत जेल में सुनील राठी के रहने के दौरान जेल प्रशासन पंगु हो जाता था। इसकी एक बानगी मुन्ना बजरंगी हत्याकांड भी है। निलंबित जेलर यूपी सिंह ने बजरंगी की हत्या का मुकदमा सुनील राठी के खिलाफ दर्ज कराया। सुबह सवा छह बजे हत्या हुई और थाने पर प्राथमिक सूचना देने का समय दर्शाया गया है साढे़ सात बजे। इससे जाहिर है कि वारदात के बाद जेल प्रशासन किस तरह हड़बड़ाया हुआ था। जेल से थाने की दूरी करीब छह किलोमीटर है। पुलिस को सूचना देरी से देने को लेकर जेल प्रशासन भी जांच के दौरान निशाने पर आ सकता है।