आखिर कब तक चलेगा अवैध खनन का खेल?
बागपत। काठा नाव हादसे की एक वजह अवैध रेत का खनन भी है। खनन के गड्ढ़े में नाव फंसी और 19 लोगों की जिंदगी चली गई। सवाल है कि आखिरकार अवैध खनन का खेल कब तक चलेगा। माफिया पुलिस-प्रशासन से आंख-मिचौली खेलते रहते हैं। प्रशासन सख्ती दिखाता है तो पहले से स्टॉक किए गए बालू की सप्लाई शुरू कर दी जाती है।
बागपत के सांकरौद, मवीकलां, काठा, पाली, निवाड़ा, गौरीपुर जवाहरनगर, नैथला, फैजपुर-निनाना, खेड़ा इस्लामपुर, सुल्तानपुर हटाना, लुहारी, कोताना, जागोस, बदरखा समेत कई गांव यमुना किनारे बसे हैं। खनन माफिया अधिकांश गांवों में बालू का अवैध खनन करते है। काफी-कभी तो पॉर्कलेन मशीन से शुरू कर देता है। प्रशासन सख्ती दिखाता है तो मशीन को हटा दिया जाता है। कभी दिन में तो कभी रात में अवैध खनन चलता है। पुलिस-प्रशासन की नाक तले खनन का खेल चलता है, इस वजह से सवाल उठने लाजिमी हैं क्योकि अफसरों के आंखों के सामने खनन होता रहता है और माफियों पर कोई कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति अधिक होती है।
बालू के स्टॉक पर छापा लगा, नहीं हुई कार्रवाई
बागपत। शहर के दिल्ली रोड पर पुलिस ने दो दिन पूर्व ही छापामारी की। पुलिस की टीम दो युवकों को पकड़कर कोतवाली भी लेकर आई। लेकिन लिखा-पढ़ी में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुए।
ट्रक नहीं यहां पुलिस पकड़ती है बुग्गी
बागपत। पुलिस और प्रशासनिक अफसर अधिकांश भैसा बुग्गिया और ट्रैक्टर की छोटी ट्रालियों को पकड़कर ही कार्रवाई के नाम पर इतिश्री कर देती है। हाईवे से रात-दिन रेत के ट्रक गुजरते रहते है, उन पर किसी का कोई ध्यान नहीं जाता है।
प्रशासन की रोक के बावजूद
बना दिया था रास्ता
बागपत। बालू खनन के परिवहन के लिए खनन माफियों ने फैजपुर-निनाना और फैजुल्लापुर गांव के खेतों से रास्ता निकाल दिया था। शिकायत मिलने पर तत्कालीन एसडीएम मनोज कुमार सिंह और सीओ श्वेतांभ पांडेय ने मार्च माह में छापामारी कर रास्ता खुदवा दिया था। हिदायत दी थी कि कोई भी यहां से रेत के वाहन न गुजारे। उसके बावजूद माफिया ने गड्ढे बंद कर वाहन शुरु कर दिए थे। प्रशासन की दोबारा की छापामारी में इसका खुलासा हुआ था। बाद में आरोपी अर्जुन निवासी निवाड़ा के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।