बागपत। मुन्ना बजरंगी हत्याकांड में पुलिस की जांच की कड़ी नहीं जुड़ पा रही है। पुलिस को अब सबसे बड़ा सहारा सर्विलांस का है। वारदात में इतनी गुत्थियां की है, पुलिस पूरी तरह उलझी हुई है। मुन्ना बजरंगी की जेल में एंट्री से लेकर हत्या तक की हकीकत तक पहुंचना ही पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। पुलिस को अब सर्विलांस का ही सहारा रह गया है।
मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं बंदी
बागपत। सुनील राठी के फतेहगढ़ जेल में शिफ्ट हो जाने के बाद भी बागपत जेल में बंदी मुंह खोलने को तैयार नहीं है। अभी तक पुलिस एक सौ से ज्यादा बंदियों के बयान ले चुकी है। अधिकतर में सिर्फ यही जानकारी मिली है कि वह सो रहे थे और गोली चलने की आवाजें आई। कुछ बंदियों ने कहा कि वह नहाने की तैयारी कर रहे थे, कुछ का कहना है कि वह शौचालय में थे। वारदात कैसे हुई, पुलिस इस गुत्थी में भी उलझी है।
25 जुलाई तक मजिस्ट्रेट जांच, अब तक कोई नहीं पहुंचा
बागपत। मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की मजिस्ट्रेट जांच 25 जुलाई तक होनी है। एडीएम लोकपाल सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है। अभी तक उनके पास कोई बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचा है। न लिखित और न ही मौखिक तौर पर किसी ने बयान दर्ज कराए हैं।
कोड को डि- कोड करने में जुटी पुलिस
बागपत। जिला कारागार से बंदी मोबाइल पर बातचीत में कोड का इस्तेमाल करते रहे हैं। सर्विलांस पर इसका खुलासा भी हुआ है। कोड के जानकार अधिकारी इन्हें डि- कोड करने में जुटी हुई है।