पुलिस आगे दौड़ी और पीछे गांव वाले
बागपत। यमुना खादर में रास्ते के विवाद का हल निकालने के लिए करीब चार घंटे तक माथापच्ची चलती रही। दोनों पक्षों के बीच कई बार तनाव हुआ। जैसे ही फायरिंग और पथराव शुरू हुआ तो भगदड़ मच गई। जिसे जहां जगह मिली, वहीं पर छिपकर जान बचाई। अफसर अपनी गाड़ियों में बैठकर हरियाणा की तरफ भाग निकले। बाद में दोबारा पुलिस हिम्मत कर वापस लौटी और मामला शांत हुआ।
बृहस्पतिवार को निवाड़ा यमुना खादर में एसडीएम विवेक कुमार यादव ग्रामीणों को समझाने में लगे थे। पुलिस भी ग्रामीणों की भीड़ को वहां से हटाने में जुटी हुई थी। इसी दौरान निवाड़ा की तरफ टेंट लगाकर बैठे खनन ठेकेदार पक्ष के युवकों ने फायरिंग शुरू कर दी। गोलियां चलते ही वहां मौजूद ग्रामीणों में भगदड़ मच गई। ग्रामीण यमुना नदी के किनारों से होते हुए पुल के दूसरी तरफ पहुंच गए और किसी तरह इधर-उधर छिपकर अपनी जान बचाई। एसडीएम विवेक यादव, एंटी भूमाफिया टीम व पुलिस अपनी-अपनी गाडिय़ों में बैठ कर हरियाणा की तरफ से निकले। ग्रामीणों ने पुलिस को दौड़ाया और पथराव भी किया।
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कमरे और शौचालय में तलाशी जगह
बागपत। निवाड़ा यमुना खादर में खनन ठेकेदारों पर जब गोलियां खत्म हो गई तो ग्रामीणों ने उन पर पथराव शुरू कर दिया। ठेकेदार के लोग पास में ही मौजूद श्मशान घाट में स्थित एक कमरे में घुस गए और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया। ग्रामीणों में इतना आक्रोश था कि उन्होंने वहां खड़ी ठेकेदारों की गाड़ियों में तोडफ़ोड़ शुरू कर दी। वहां रखे डीजल के ड्रम गिरा दिए। टेंट में आग लगा दी। ग्रामीणों का गुस्सा फिर भी शांत नहीं हुआ। श्मशान घाट के कमरे की छत पर चढ़कर ग्रामीणों ने छत उखाडने का प्रयास किया। शौचालय में छिपकर बैठे युवकों को पीटा गया।
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नाराज ग्रामीणों ने कार पलट दी
बागपत। यमुना में बवाल के बाद जब ग्रामीण वापस गांव लौट रहे तो बागपत-सोनीपत मार्ग पर खड़ी एक स्विफ्ट डिजायर कार को ग्रामीणों पलट दिया।
पुलिस का इंतजार करते रहे अफसर
बागपत। निवाड़ा यमुना खादर में बवाल होने से पहले ही अफसरों ने पुलिस को सूचना दे दी थी, लेकिन बवाल खत्म होने के बाद पुलिस फोर्स मौके पर पहुंचा। यदि पुलिस सूचना के तुरंत बाद ही मौके पर पहुंच जाती तो स्थिति पर काबू पाया जा सकता है।
उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जाए जांच
बागपत। सर्वजन समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदेश कुमार का कहना है कि किसानों को सूचना दिए बिना ही यमुना खादर में उनकी फसल उजड़ी गई है। यह गलत है। प्रशासन को शांति पूर्वक मामले का निपटारा करना चाहिए थे। इस बवाल में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष कुर्बान खान समेत कई किसान घायल हुए है। इस मामले की उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जाए और दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।