बसी के ट्रिपल मर्डर में जेठ व देवर को आजीवन कारावास
बागपत। बसी गांव के ट्रिपल मर्डर में दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। नौ साल पहले जेठ व देवर ने महिला व उसके दो बच्चों की फावड़े से काटकर हत्या कर दी थी। एडीजे प्रथम देवी शंकर प्रसाद श्रीवास्तव की कोर्ट में सजा सुनाई गई।
एडीजीसी सुरेंद्र यादव और अभियान पक्ष के अधिवक्ता राहुल नेहरा ने बताया कि 17 सितंबर को 2009 बसी गांव में मनीता पत्नी कुसुमपाल, उसके बेटे रिंकू व बेटी रीमा की फावड़े से काटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतका मनीता की मां शांति पत्नी जसराम निवासी गलीगढ़ी रावली थाना निवाड़ी जिला गाजियाबाद ने खेकड़ा थाने पर मनीता के जेठ कृष्णपाल व देवर संजीव उर्फ कालू पुत्रगण लाला उर्फ सरदारे के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। शांति देवी इस हत्याकांड का चश्मदीद गवाह थी। घटना वाले दिन वह अपनी बेटी मनीता के पास आई हुई थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। यह मामला एडीजे प्रथम देवी शंकर प्रसाद श्रीवास्तव की कोर्ट में चल रहा था। बृहस्पतिवार को अभियुक्तों पर दोष सिद्ध हो गया था। शुक्रवार को कोर्ट में अभियुक्त कृष्णपाल व संजीव उर्फ कालू को आजीवन कारावास एवं एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्तों को दो-दो के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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चौदह बीघा जमीन के लिए कर दिया परिवार का खात्मा
बागपत। बसी गांव में नौ साल पहले चौदह बीघा जमीन को लेकर अपनों ने ही अपने एक परिवार का खात्मा कर दिया था। बसी गांव निवासी सरदार सिंह नैन के तीन बेटे कृष्णपाल, कुसुमपाल व संजीव थे। दो बेटों कृष्णपाल व संजीव का चाल चलन ठीक न होने के कारण सरदार सिंह ने कुसुमपाल के बेटे रिंकू के नाम पूरी जमीन की वसीयत कर दी थी। दोनों भाई कृष्णपाल व संजीव बाहर जाकर रहने लगे थे। इसी बीच कुसुमपाल की मुरादाबाद के गजरौला रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से गिरकर मौत हो गई थी। उसके बाद उसकी पत्नी मनीता व दोनों बच्चों की कृष्णपाल व संजीव ने फावड़े से काटकर हत्या कर दी थी।