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Baghpat News: खतरे में बच्चों की जान, जिम्मेदार फरमा रहे आराम

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बागपत। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल बसों व अन्य वाहनों के लिए भले ही सरकार ने नियम बनाए हुए हों। मगर यहां स्कूल बसों के परमिट नहीं हैं तो किसी की फिटनेस नहीं है। डग्गामार वाहनों को स्कूलों में दौड़ाया जा रहा है। एआरटीओ का अभियान भी केवल कागजों तक सिमटा हुआ है।
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-स्कूल में 413 बस व अन्य वाहन, 125 का परमिट नहीं
यहां करीब 87 निजी स्कूल हैं और इनमें 413 बस व अन्य वाहन चल रहे हैं। इनमें ऐसे भी वाहन हैं, जो बिना परमिट के चल रहे हैं। उनमें किसी का निजी परमिट है तो किसी का कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए परमिट लिया हुआ है। वहीं स्कूल के लिए अलग से परमिट दिया जाता है, जिसके लिए सभी जरूरी नियमों को पूरा करना होता है। यहां ऐसा नहीं किया गया है।
-डग्गामार वाहनों में बच्चों को ठूंसकर भरा जा रहा
यहां स्कूलों ने ऐसा भी किया हुआ है कि उन्होंने अपनी बसें चलाने की जगह बाहरी लोगों को ठेका दिया हुआ है। उन ठेकेदारों ने डग्गामार वाहनों को स्कूलों में लगाया हुआ है। इनमें टाटा मैजिक, जीप आदि शामिल हैं। किसी ने बस लगाई हुई है तो उनमें भी नियमों का पालन नहीं किया गया है। इन डग्गामार वाहनों में ठूंसकर बच्चों को भर दिया जाता है और उनमें दम घुटने व हादसा होने का डर रहता है। यहां बृहस्पतिवार को भी ऐसे ही वाहनों में 15 की जगह 25 बच्चों को ठूंसकर भरा हुआ था तो किसी में आठ की जगह 16 बच्चे भरे हुए थे।
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हादसा होने के बाद ही जागता है एआरटीओ विभाग
यहां कोई भी हादसा होने के बाद ही एआरटीओ विभाग जाता है और उससे पहले उनका ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान केवल कागजों में चलता रहता है। अब भी 22 जुलाई तक बिना परमिट व डग्गामार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अभियान चलाने का दावा किया गया था, मगर सड़क पर वह अभियान दिखाई नहीं दिया और केवल नोटिस जारी करके खानापूर्ति कर दी गई। यहां पहले क्रिस्तू ज्योति स्कूल बागपत के बाहर हादसे में छह बच्चे घायल हो गए थे तो चमरावल में एक बच्चे की मौत हो गई थी। तब कई दिन तक अभियान चला और पिछले दो साल से अभियान ही नहीं चल रहा।

स्कूल बसों के लिए यह नियम
-ट्रांसपोर्ट परिमट होना चाहिए।
-चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव हो।
-स्कूल बस पर पीले रंग से पेंट होनी चाहिए।
-बस के आगे व पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
-शीशों के साथ ही लोहे के पाइप व जाली लगी होनी चाहिए।
-बस के अंदर अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।
-स्कूल वाहन की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक नहीं हो।
-बस में फस्ट एड बॉक्स होना चाहिए।
-बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिएं।
-स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
-दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह होनी चाहिए।

अभिभावक भी इन बातों का रखें ध्यान
-बस खड़ी होने पर ही बच्चों को चढ़ाएं।
-चालक के बारे में पूरी जानकारी रखें और उसका चरित्र प्रमाण पत्र भी देखें।
-बस में एक हेल्पर है या नहीं।
-बच्चों के आने और जाने के समय पर ध्यान रखें।
-बस के अंदर बच्चों को बैठने के लिए जगह मिल रही है या नहीं।
-बस में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।

तीस सीट की मिनी बस में 40-45 बच्चों को भरकर बस में ले जाते हैं। स्कूल संचालक फीस समय पर जमा कर लेते हैं, लेकिन सुविधा नहीं देते हैं। एआरटीओ को लगातार अभियान चलाकर बिना परमीट की स्कूल बस व वाहनों पर कार्रवाई करनी चाहिए। -कुलदीप देव शर्मा, अभिभावक गायत्रीपुरम कॉलोनी

स्कूल बसों के कारण कई बार हादसा हो चुके हैं। उसमें बाद में पता चलता है कि बस का परमिट नहीं था। अगर पहले ही अधिकारी उनकी जांच करके बंद करा दे तो हादसे नहीं होंगे। मगर अधिकारी कभी अभियान चलाते हैं तो केवल चालान करके खानापूर्ति कर देते हैं। -अंकुर जैन, अभिभावक बड़ाबाजार
विभाग की ओर से ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, उनको नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अब सड़कों पर उतरकर अभियान शुरू किया जाएगा और ऐसे वाहनों पर शिकंजा कसा जाएगा। =राघवेंद्र सिंह, एआरटीओ
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