खेकड़ा। देश भर में खसरे के मरीज मिल रहे हैं। यह बच्चों के लिए खतरनाक है। इससे बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नौ माह से 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को एमआर (मीजल्स रूबेला) का टीका लगवाने की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को सीएचसी पर सीएचओ और एएनएम को प्रशिक्षण दिया।
सोमवार को खेकड़ा सीएचसी पर आयोजित सीएचओ और एएनएम के प्रशिक्षण में सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरविंद मलिक ने बताया कि खसरे के लक्षणों में बुखार का आना, सर्दी-जुकाम के साथ शरीर पर दाने या चकत्ते पड़ते हैं। अगर समय पर उपचार नहीं कराया गया तो दिमागी बुखार का भी खतरा हो सकता है, जो जानलेवा है।
बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बच्चों को विशेष टीकाकरण अभियान और इंद्रधनुष अभियान चलाकर टीका लगाया गया था। अब फिर से सर्वे कराकर मालूम किया जाएगा कि कितने बच्चों को खसरे का टीका नहीं लग पाया।
बताया कि खसरा होने के बाद बच्चों में निमोनिया, डायरिया भी हो जाता है। कुछ बच्चों में ब्रांकाइटिस के भी लक्षण दिखाई देते हैं। इससे बचाव के लिए 12 से 15 महीने के बीच बच्चे को खसरे का टीका लगवा देना चाहिए। खसरे से बचाव के लिए जनवरी, फरवरी और मार्च माह में अभियान पखवाडे़ के रूप में चलाया जाएगा। इसमें पांच वर्ष तक के बच्चों को टीके लगाए जाएंगे।