बागपत। शासन की जांच में सीडीओ एमएल व्यास पर अधिकारियों पर कार्यों का भुगतान करने के लिए दबाव डालने और भुगतान नहीं करने पर उत्पीड़न करने के आरोप लगे हैं। कर्मचारियों के तबादलों व कार्रवाई के मामलों में निजी हित के लिए हस्तक्षेप करने और कार्यों में लापरवाही की बात भी जांच रिपोर्ट में कही गई। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त ने सीडीओ को मुख्यालय से संबद्ध करने और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर दी।
विधायक योगेश धामा ने सीडीओ एमएल व्यास के खिलाफ शासन में शिकायत की थी। जिसकी जांच डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह को करके जल्द रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सीडीओ एमएल व्यास शासकीय कार्यों और योजनाओं के अनुश्रवण में रुचि नहीं दिखाते हैं। वह कार्यों को भूल जाते हैं। वह अधीनस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्यों का भुगतान करने का दबाव बनाते हैं और ऐसा नहीं करने पर उनका उत्पीड़न करते हैं। इसके अलावा भी जांच रिपोर्ट में उनके खिलाफ कई मामलों को जिक्र किया गया है।
डीएम की इस जांच रिपोर्ट पर ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने सीडीओ को मुख्यालय से संबद्ध करने और कार्रवाई की संस्तुति कर दी। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि इस मामले में कार्रवाई शासन स्तर से ही की जा रही है। वह इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
- जिला पंचायत अध्यक्ष को बचाने में फंस गए सीडीओ
यह पूरा मामला जिला पंचायत अध्यक्ष ममता किशोर व उनके पति जयकिशोर की शासन में शिकायत से शुरू हुआ था। भाजपा विधायक योगेश धामा ने ममता किशोर व उनके पति पर जिला पंचायत के विकास कार्यों में घोटाले, ठेकेदारों से रुपये लेकर ठगी करने, ममता किशोर की जगह जयकिशोर के फाइलों पर हस्ताक्षर करने समेत अन्य शिकायत की थी। जिसके साथ कई जिला पंचायत सदस्यों के शपथ पत्र भी लगे थे। शासन से उसकी जांच सीडीओ एमएल व्यास को सौंपी गई थी। सीडीओ ने सभी मामलों में जिला पंचायत अध्यक्ष को क्लीनचिट देते हुए उसके पक्ष में रिपोर्ट सौंप दी। जबकि कई मामलों में विधायक ने साक्ष्य भी शिकायत के साथ दिए थे। इस तरह जिला पंचायत अध्यक्ष को क्लीनचिट देने का पता चलने पर विधायक ने सीडीओ की शासन में शिकायत की थी। जिसके आधार पर जांच कराई गई।