बागपत। भूसे की धूल और गर्म हवा से लोगों की सांस फूल रही है। जिला अस्पताल में एक सप्ताह में सांस के मरीजों की ओपीडी बढ़ी है। अस्पताल में रोजाना करीब 50 मरीज जांच कराने के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सक लोगों को दवा के साथ धूल और गर्मी से बचाव की सलाह दे रहे हैं।
थ्रेशिंग और गर्मी से अस्थमा (दमा) रोगियों की सांसें फूलने लगी हैं। मौसम में परिवर्तन और भूसे की धूल से वातावरण दूषित होने लगा है। तेज धूप और हवा में धूल के कारण दमा रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। चिकित्सकों का कहना है कि अस्थमा सांस से जुड़ी बीमारी है, इसमें मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है। इस बीमारी से सांस की नली में सूजन या पतलापन आ जाता है। जिससे सांस लेते समय फेफड़ों पर अधिक दबाव महसूस होता है और मरीज की सांस फूलने लगी है। इसके अलावा मरीज को खांसी होने लगती है और सीने में जकड़न के साथ साथ खड़खड़ाहट की आवाज आने लगती है।
अस्थमा के लक्षण
-सांस फूलना
-लगातार खांसी आना
-छाती में कफ जमा होना
-सांस लेने में परेशानी होना
ऐसे करें बचाव -थ्रेसिंग क्षेत्र से दूरी बनाकर रखें
-धूप में काम करने से बचें
-सिर को ढककर ही घर से निकले
-धूल से बचाव के लिए मास्क का प्रयोग करें
-निमोनिया का टीका लगवाएं
-धुम्रपान न करें और गर्मी से बचाव करें
-दवा तो हर रोज खा रहे हैं, लेकिन सांस की परेशानी का स्थाई इलाज नहीं मिल पा रहा है। दमा बहुत खतरनाक है। रात-दिन चैन नहीं मिलता है। - ऋषिपाल, जौहड़ी
-पिछले कुछ दिन से सांस लेने में अधिक परेशानी हो रही है। चिकित्सक ने दवा के साथ गर्मी और धूल से बचाव के लिए मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी है। - नरेश, खडखड़ी
वर्जन -
गर्मी में काम करने और थ्रेशिंग के समय सांस की बीमारी बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। हवा में धूल के कण होने के कारण मरीजों को सांस लेने में परेशानी होती है। सांस के मरीजों को वायु प्रदूषण, सिगरेट का धुआं, थ्रेशिंग से दूर रहना चाहिए। - डॉ. दीपक कुमार, फिजिशियन जिला अस्पताल