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श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे भरत

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अग्रवाल मंडी टटीरी। कस्बे के राधा-कृष्ण ठाकुरद्वारा मंदिर में चल रहे रामचरित्र मानस पाठ के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य विनोद शास्त्री ने राम बनवास और भरत मिलान का वृतांत सुनाया। भरत चित्रकूट पहुंचकर भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं, मगर भगवान के मना करने पर वह उनकी चरण पादुका लेकर अयोध्या लौट आते हैं।
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उन्होंने कहा कि कैकेयी के वचनों को पूरा करने के लिए श्रीराम, सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष के लिए बनवास चले जाते हैं। श्रीराम के वियोग में राजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। राजा दशरथ के निधन के बाद भरत और शत्रुघ्न अयोध्या पहुंचते हैं, जहां श्रीराम के बनवास जाने पर वह क्रोधित हो उठते हैं और राज्य करने से इंकार कर देते हैं। भरत तीनों माताओं के साथ भगवान श्रीराम से मिलने चित्रकूट पहुंचते हैं और उनसे अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं।
भगवान श्रीराम पिता का वचन पूरा किए बगैर अयोध्या लौटने से इंकार कर देते हैं, जिस पर भरत भगवान श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौट आते हैं। कथा में पूर्व चेयरमैन प्रमोद गुप्ता, पंडित अंकुर शर्मा, दीप गोयल, संजीव शर्मा, प्रवीण मित्तल, नितिन मोगा, राजीव गोयल, नरेंद्र गुप्ता, सोनू मित्तल, राकेश गोयल, ओमप्रकाश व महिलाएं और बच्चे मौजूद रहे।
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