बागपत। देश की आजादी के लिए लड़ाई में बागपत का अहम योगदान रहा है। सिसाना गांव में अपने दोस्त विमल प्रसाद जैन के घर रहकर ही सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त ने अंग्रेजी संसद में बम फेंकने की योजना बनाई थी। यहां से जाने के अगले ही दिन संसद में बम फेंके गए थे।
बागपत के सिसाना गांव के रहने वाले लाला विमल प्रसाद जैन की सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और बटुकेश्वर दत्त से दोस्ती थी। अंग्रेजी संसद में बम फेंकने की योजना व नक्शा बनाने से लेकर अंदर जाने के लिए जरूरी कागज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी विमल को सौंपी गई थी।
जिसके लिए भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और बटुकेश्वर दत्त 24 मार्च 1929 को बम लेकर सिसाना गांव में पहुंचे थे। जहां बम छिपाए गए और वहां संसद में बम फेंकने की पूरी योजना बनाई गई। यहां से एक दिन पहले दिल्ली जाने के बाद आठ अप्रैल 1929 को संसद में घुसकर बम फेंके थे। जबकि लाला विमल प्रसाद जैन व चंद्रशेखर आजाद बंदूक लेकर बाहर खड़े रहे।
बम फेंकने के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। जबकि विमल पहले से बनाई योजना के तहत बम फेंकने की जिम्मेदारी लेने की जानकारी दिल्ली में एक अखबार के कार्यालय में देने पहुंच गए थे। उसके कुछ दिन बाद उनको भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
मंत्री बनने से कर दिया था इन्कार
देश की आजादी के बाद प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपनी सरकार में मंत्री बनाने के लिए विमल प्रसाद जैन को निमंत्रण दिया था। मगर उन्होंने मंत्री बनने से इन्कार कर दिया था। कहा था कि वह मंत्री बनने के लिए आजादी की लड़ाई नहीं लड़े थे।
परिवार के लोग आज भी बताते हैं किस्से
लाला विमल प्रसाद जैन के भतीजे सत्येंद्र और जिवेंद्र बताते हैं कि उनके परिवार के सदस्य देश की आजादी की लड़ाई में शामिल रहे। उनको पिता स्व. जगदीश प्रसाद जैन ने सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त व विमल प्रसाद जैन से जुड़े किस्सों के बारे में काफी बताया। यह भी बताया कि किस तरह से उनके ताऊ को अंग्रेजों ने खूब यातनाएं दीं, लेकिन वह देश की आजादी के लिए लड़ते रहे।
सिसाना में रहे थे भगत सिंह, चंद्रशेखर व बटुकेश्वर
इतिहासकार डाॅ. अमित राय जैन बताते हैं कि सिसाना गांव के लाला विमल प्रसाद जैन की सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त के साथ दोस्ती थी। अंग्रेजी संसद में बम फेंकने की योजना भी सिसाना में बनी थी, क्योंकि उसकी योजना की पूरी जिम्मेदारी विमल प्रसाद जैन को सौंपी गई थी। इस तरह सिसाना गांव का नाम देश की आजादी की लड़ाई के साथ जुड़ा हुआ है।