यज्ञ एक श्रेष्ठ कर्म- प्रीतम सिंह वर्माफोटो संख्या 6
बड़ौत। रेलवे रोड स्थित आर्य समाज भवन और बावली चौक स्थित आर्य समाज पट्टी चौधरान कार्यालय में आयोजित सप्ताहिक यज्ञों में आर्यजनों ने यज्ञ में आहुतियां देकर धर्म लाभ उठाया।
इस अवसर पर प्रीतम सिंह आर्य ने कहा कि यज्ञ एक श्रेष्ठ कर्म है, ऋषि मुनियों की खोज का परिणाम है। यज्ञ संपूर्ण मानव जाति की बीमारियों के विरुद्ध एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है। यज्ञ शब्द उस स्वर्गीय प्रक्रिया, पद्धति और जीवनशैली का नाम है, जो मनुष्य के जीवन को श्रेष्ठ बनाने का कार्य करती है। यज्ञ जीवन की समस्त भौतिक और आध्यात्मिक उपलब्धियों की कुंजी है। जब से मनुष्य जाति का वेदों से परिचय हुआ, उस काल से ही यज्ञों का प्रचलन मनुष्य की चेतना और उसके वातावरण से जुड़ा है। भौतिक दृष्टि से देवताओं के रखरखाव का अद्भुत साधन है। देवताओं (जल, वायु, आकाश, पृथ्वी तथा अग्नि) के बिना हमारे जीवन का अस्तित्व ही संभव नहीं है। आर्य समाज बड़ौत द्वारा आयोजित यज्ञ के ब्रह्मा समरभानु आचार्य और यजमान जसवीर मलिक रहे। आर्य समाज पट्टी चौधरान द्वारा आयोजित यज्ञ के ब्रह्मा राजेंद्र आर्य, यजमान राममेहर सिंह रहे। दोनों यज्ञों में डाक्टर ओमवीर सिंह आर्य, हरवीर सिंह धामा, जसवीर मलिक, सुरेंद्र सिंह, ओमपाल राठी, तेजेंद्र चौहान उपस्थित रहे।