बागपत। यमुना में नाव पलटने से 19 लोगों की मौत के बाद काठा गांव में हुए बवाल के आरोपी की जमानत अर्जी सोमवार को न्यायालय ने खारिज कर दी। वहीं, इस मामले में अन्य आरोपियों के गैर जमानती वारंट जारी हैं।
एडीजीसी अनुज ढाका ने बताया कि काठा गांव में 14 सितंबर 2017 की सुबह किसान व मजदूर नाव में बैठकर यमुना पार खेतों में जा रहे थे। इसी दौरान नाव डूब गई थी। उसमें सवार 32 लोग भी यमुना में डूब गए थे। इनमें से 19 की मौत हो गई थी, जबकि अन्य को बचा लिया था। इस घटना के बाद कुछ लोगों ने बवाल कर पुलिस पर पथराव कर दिया था। इतना ही नहीं पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों को फूंक दिया था। जिसमें तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश कुमार समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
इस मामले में एसआई अमन सिंह ने काठा गांव के कालू उर्फ कृष्णपाल, कालू, डॉ. विवेक, वकील, संजीव उर्फ नीटू नामजद समेत 60 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। एडीजीसी अनुज ढाका ने बताया कि पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। कोर्ट में तारीख पर नहीं आने पर न्यायाधीश ने आरोपियों के गैर जमानती वारंट जारी कर दिए। जिसमें कालू उर्फ कृष्णपाल सरेंडर कर जेल चला गया था। सोमवार को अपर सत्र न्यायालय चतुर्थ में कालू उर्फ कृष्णपाल की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। जिसे न्यायाधीश सुशील कुमार ने खारिज कर दिया।