ऐसा करने वाले कोई निर्दलीय नहीं है, बल्कि भाजपा, बसपा व अन्य पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने वालों ने भी ऐसा किया है। उनका मानना है कि उनके परिवार से जितने ज्यादा प्रत्याशी होंगे, उनके उतने ज्यादा एजेंट बनेंगे। जिससे वह मतदान और मतगणना के दौरान नजर रख सके और किसी तरह की गड़बड़ी होने पर तुरंत पकड़ी जा सके।
इन जगहों पर परिवार वाले मैदान में उतरे
- बागपत में आम आदमी पार्टी से शराफत अली और निर्दलीय उनकी पत्नी नसीमा
- अमीनगर सराय में भाजपा से मांगेराम यादव, निर्दलीय उनकी पत्नी कमलेश, उनका बेटा विमल
- बड़ौत में बसपा से मुकेश व निर्दलीय उनकी पत्नी सुशीला
- छपरौली से धर्मेंद्र व उनकी पत्नी रश्मि, विक्रम सिंह व उनकी पत्नी हेमलता
- रटौल में भाजपा से मुंतजीर, निर्दलीय उनका भाई मुबस्सिर, जुलेखा पत्नी मुबस्सिर, निर्दलीय शाहिर व उसकी पत्नी शबाना चुनाव मैदान में उतरे हुए हैं।