निखिल ने बताया कि वह दिल्ली के छतरपुर में इंटर कॉलेज में निजी शिक्षक है और उसके पिता दिल्ली पुलिस में सिपाही पद से सेवानिवृत्त होकर गांव में खेती कर रहे थे। उनकी मई में मौत हो गई थी। इसके बाद उसने मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर खतौनी में विरासत में नाम दर्ज कराने के लिए लेखपाल से संपर्क किया। लेखपाल ने कागज लेकर साढ़े तीन हजार रुपये की मांग की। साथ ही पिता के नाम में गड़बड़ी होना भी बताया।
कई बार लेखपाल से संपर्क किया गया, लेकिन उसने पैसे लिए बिना काम करने से इंकार कर दिया। इसकी शिकायत निखिल ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन के अधिकारियों से कर दी। शुक्रवार को ट्रैप टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर दुर्गेश कुमार के साथ लेखपाल विनोद कुमार के गली नंबर चार स्थित निजी कार्यालय में पहुंचे। जहां लेखपाल ने रिश्वत के साढ़े तीन हजार रुपये ले लिए, तो टीम ने उसे पकड़ लिया। दुर्गेश कुमार ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराकर लेखपाल को पुलिस को सौंप दिया।