बागपत। 15 अक्तूबर से शुरु हो रहे शरदीय नवरात्र में बुधादित्य योग, शश योग और भद्रयोग बन रहा है। इस बार हाथी पर सवार होकर माता आएंगी। नवरात्र में तीन शुभ संयोग बनने से श्रद्धालुओं को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होगी। चित्रा नक्षत्र में घट स्थापना करने से जीवन की बाधाएं दूर होगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि शुभ योग में माता की उपासना करने से उत्तम फल की प्राप्ति होगी। बुधादित्य योग बनने से जातक का मान-सम्मान, यश, कीर्ति प्रतिष्ठा और व्यापार में बढ़ौत्तरी होती है। उन्होंने बताया कि घर के ईशान कोण में देवताओं का वास होता है। नवरात्र में शुभ मुहूर्त में ईशान कोण में घट की स्थापना कर देशी घी का अखंड दीपक और अग्नि कोण में भैरव जी का तेल का दीपक जलाना चाहिए। इस बार नवरात्र में 30 साल बाद शनिदेव अपनी राशि में कुंभ में विराजमान रहेंगे। नवरात्र में माता की उपसना करने से शनि की साढ़े साती और ढैय्या के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलेगी। इस बार माता रानी हाथी पर सवार होकर आ रही है, जिससे इस वर्ष वर्षा का योग अधिक रहेगा और देश में अन्न के भंडार बढ़ने के संकेत है। माता का विधि-विधान से पूजन करने से सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होगी। 22 अक्तूबर को दुर्गाष्टमी और 24 अक्तूबर को विजय दशमी का त्योहार मनाया जाएगा।