पुरा महादेव मंदिर में पहुंचे राष्ट्रीय विप्र विद्घत परिषद के पदाधिकारी व सदस्य
- फोटो : BAGHPAT
बागपत। राष्ट्रीय विप्र विद्धत परिषद की शुक्रवार को बैठक हुई। इसमें रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर विचार विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि रक्षाबंधन के त्योहार को लोगों में असमंजस है। विश्व विजय पंचांग, दिवाकर पंचांग, मार्तण्ड पंचांग और काशी पंचांग के आधार पर रक्षाबंधन के त्योहार के लिए 11 अगस्त श्रेष्ठ है।
बताया कि 11 अगस्त को 10:38 बजे तक चतुर्दशी रहेगी। इसके बाद 12 अगस्त सुबह सात बजे तक पूर्णिमा रहेगी। प्रतिपदा युक्त पूर्णिमा में रक्षाबंधन का त्योहार शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्ट का कारण बनती है। 11 अगस्त को 12 बजकर सात मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक अभिजित मुहूर्त अति उत्तम है। शाम छह बजे से रात्रि में आठ बजकर 20 मिनट और रात्रि में आठ बजकर 49 मिनट से साढे़ नौ बजे तक राखी बांध सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने कहा कि 11 अगस्त को भद्रा का साया रहने से भी लोग उहापोह में है। भद्रा काल में शुभ कार्य करना निषेध माना जाता है। शास्त्रों में रक्षाबंधन और होली भद्रा रहित मनाना बताया गया है। पृथ्वी लोक में भद्रा का वास ज्यादा कष्टकारी होता है। 11 अगस्त को भद्रा का वास पाताल में होने के कारण इसका दोष नहीं के बराबर है। भद्रा के बारे में शास्त्रों में लिखा है कि स्वर्गे भद्रा शुभ कुर्यात् पाताले च नाम मृत्यु लोके स्थिता भद्रा सर्व कार्य विनाशनी अर्थात भद्रा अगर पाताल लोक में होती है, तो पृथ्वी लोक में शुभ फल देती है। पंचांगों के आधार पर 11 अगस्त को 10:39 बजे के बाद पूर्णिमा में रक्षाबंधन श्रेष्ठ है। बैठक में परशुरामेश्वर मंदिर के पुजारी जयभगवान शर्मा, पंडित आचार्य पुष्पेंद्र शर्मा उर्फ सोनू, पंडित आचार्य अनुज व्यास, आचार्य प्रमोद, आचार्य उमेश कौशिक, अनुज दयाल, आचार्य सतीश भारद्वाज मौजूद रहे।