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अहंकारी मनुष्य कटी पतंग के समान:पंडित महेश जैन-120 श्रीफल समर्पित कर उत्तम मार्दव धर्म को अंगीकार किया

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120 श्रीफल समर्पित कर उत्तम मार्दव धर्म को अंगीकार किया
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बिनौली। कोरोना महामारी से रक्षार्थ के लिए श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र बरनावा में चल रहे 41 दिवसीय अखंड शांतिनाथ विधान मेंशनिवार को श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ दशलक्षण पर्व धर्म के दूसरे सोपान में उत्तम मार्दव धर्म के पावन प्रसंग पर 120 श्री फलों द्वारा भगवान शांति नाथ पूजा की। विधान में हुई धर्म सभा में पंडित महेश कुमार जैन ने कहा मान, अहंकार, कषाय का मर्दन करना ही मार्दव धर्म कहलाता है। संसारी प्राणी अनादिकाल से मान और अपमान के झूले में झूलता आया है। हम सर्वत्र प्रत्येक क्षेत्र में मान चाहते है, यही चाहत हमारे समस्त दुखों का मूल है, अज्ञान का परम अंधकार का कारण है। अहंकार मान की भावना, विवेक को नष्ट कर देती है। अहंकारी मनुष्य कटी पतंग के समान होता है। जिसको पतन से बचाने के लिए कोई डोर नहीं है और जो कभी भी किसी क्षण नीचे आकर विनष्ट हो सकता है। विधान में बादामी देवी जैन, सरिता जैन, लता जैन, राकेश जैन, राजेंद्र जैन, सीता जैन आदि उपस्थित रही।
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