अग्रवाल मंडी टटीरी। रमजान के मुबारक माह को अल्लाह में अपना महीना कहा है। ईद भी अल्लाह की देन है। इस त्योहार पर अल्लाह सभी खुशियों को समेटकर बंदे के झोली में डाल देते हैं। उम्मीद करते हैं जिस परहेज से उसने रोजे रखे और उसको पूरा किया जो सीखा, उस पर आगे भी अमल करे। जब रमजान मुबारक माह की आखिरी रात होती है तो आसमानों के फरिश्ते रोते हैं। क्योंकि वे भी रमजान माह का महीना चाहते हैं। इसलिए इस रात को बहुत ही अफजल कहा गया है। हाफिज मोमिन ने कहा कि रमजान मुबारक की पहली रात को ईमान वाला गुनाहों से पाक साफ हो जाता है। रमजान का महीना उनको मौका देता है कि वह अल्लाह की राह में अपनों को ले चले और कोई भी काम ऐसा ना करें जो अल्लाह को नागवार लगता हो। अल्लाह ने तो इंसान को कदम-कदम पर सीख दे दी। अब यह इंसान पर है कि उसका पालन किस प्रकार करें। उन्होंने कहा कि इसलिए रमजान मुबारक माह में सभी को रोजे रखने चाहिए तथा अपने गुनाहों की अल्लाह से तौबा कर माफी कराएं। रोजों के साथ-साथ गरीबों का भी ध्यान रखना जरूरी है। जो गरीब है उन्हें भी अपनी खुशी की तरह खुशी में ही शामिल करें।