बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांतिनाथ विधान के पांचवें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने विधि विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की।
विधान में पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री जबलपुर ने कहा कि भगवान की भक्ति में लीन रहने वाला मनुष्य सदा सुखी रहता है। आज संसार की अर्हता को आत्मसात करते हुए भगवान अपने स्वरूप में लीन हो गए जैसे दूध में शक्कर मिलाई जाती है, तो दूध संपूर्णता को मिठास को प्राप्त हो जाता है उसी प्रकार से हम और आप भी श्री चंद्र प्रभु भगवान के दरबार में भक्ति के वातावरण दूध और शक्कर की तरह एक नेक होकर अपने आत्मिक गुणों को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति जिन महापुरुषों ने की उनकी पूजा-अर्चना भगवान से ज्यादा होने लगती है, संसार में भगवान श्री रामचंद्र सर्वश्रेष्ठ पुरुषोत्तम महापुरुष थे उनकी भक्ति हनुमान ने की तो रामचंद्र से ज्यादा भगवान राम भक्त हनुमान के मंदिर जगह-जगह पूज्यता को प्राप्त है।