दूसरों की निंदा और चुगली करना पाप - अरुण मुनि
बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा साधु श्रावक और सम्यक दर्शी बनने से यह महत्वपूर्ण है कि पाप को छोड़े। जैन स्थानक मंडी में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा हमें पाप करने में मजा आता है इसलिए हम उन्हें जबरदस्ती से पकड़ें हैं। संसारी जीव के लिए सारे पापों से बचना तो मुश्किल है मगर कलह व परिवार से तो यदि मनुष्य चाहें तो बच सकता है। दूसरों की निंदा और चुगली करना भी पाप होता है। इसमें भूषण, मनोज, प्रवीण, वीर सैन, सलेख चंद, गौरव जैन, बिजेंद्र, शैलबाला, इंद्राणी आदि रहे।