बड़ौत (बागपत)।
आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा भगवान महावीर स्वामी ने तीस साल तक केवल ज्ञान प्राप्त करने के बाद केवल ज्ञान के प्रकाश से विश्व को प्रकाशित किया है। विहर्ष सभागार में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा संत की संगति कल्याण के लिए हितकारी है। हिंसा सबसे बड़ा पाप है। हिंसा दो प्रकार की होती है। इसमें पहली द्रव्य हिंसा और दूसरी भाव हिंसा। पहली हिंसा है आरंभी हिंसा, दूसरी हिंसा विरोधी हिंसा कहलाती है। कोई दुकानदार के परिवार का विरोधक करता है तो आप उसका विरोध करते है। संकल्पी हिंसा चौथी हिंसा है। किसी भी जीव को मारने का संकल्प करना। मंगलाचरण रीता जैन ने किया। सभा में मदनलाल, प्रमोद जैन, अशोक जैन, वरदान जैन, शशि जैन, संदीप जैन आदि रहे।