अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। हाजी हाफिज वकील अहमद ने कहा कि जब ईद-उल-फितर की रात होती है तो इसका नाम आसमानी पर इनाम की रात से लिया जाता है। ईद की सुबह होती है तो हक तआला शानुहु फरिश्तों को तमाम शहरों में भेजते है। उन्होंने कहा कि फरिश्ते जमीन पर उतरकर तमाम गली, रास्तों के सिरों पर खड़े हो जाते हैं, वो पुकारते हैं कि ऐ मुहम्मद की उस्मत उस रब की दरगाह की तरफ चलों जो बहुत ज्यादा अता फरमाने वाली है। जब लोग ईदगाह की तरफ निकलते हैं तो हक तआला शानुहू फरिश्तों से दरियाफत फरमाते हैं, क्या बदला हैं, उस मजदूर का जो अपना काम पूरा कर चुका है। हाफिज वकील अहमद ने कहा कि फरिश्ते अर्ज करते हैं कि हमारे मालिक इसका बदला यही है कि उसकी मजदूरी पूरी-पूरी दे दी जाए। हर तआला शानुहू इरशाद फरमाते है कि ऐ फरिश्तों मैं तुम्हें गवाह बनाता हूं कि मैने इनकी रमजान के रोजों ओर तराबीहे के बदले में अपनी रिजा और मगफिरत अता कर दी है। मेरे बंदे मुझ से जो मांगे वही अता फरमाया जाएगा। यह तभी मिलेगा जब रोजे और नमाज ओर तराबीहे पढ़ेंगे।