अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। अग्रवाल धर्मशाला में श्रीराम कथा के दौरान कथा वाचक पं. राकेश उपाध्याय ने कहा कि श्रीराम चरित मानस एक दर्पण के समान है। जिस प्रकार दर्पण के सामने जाते ही व्यक्ति को चेहरे की समस्त कमियां उसके सामने आ जाती है। उसी प्रकार राम चरित मानस की कथा सुनने से व्यक्ति के जीवन की समस्त कमियां दृष्टिगोचर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय व्यक्ति अवलोकन करता है, उसे अपनी कमियों का एहसास होने लगता है। रामचरित मानस जीने की वो कला सिखाती है, जिसके माध्यम से व्यक्ति समाज से सम्मान प्राप्त करता है। तुलसीदास ने कहा कि रामायण एक कल्पतरू है । उन्होंने बताया कि रामायण सत्य बोलना, सत्य पर चलना सिखाती है। कथा अध्यक्ष प्रेमशंकर शर्मा, पूर्व चेयरमैन शकुंतला शर्मा, मुकेश वर्मा, दिनेश वर्मा, रामकुमार, सुभाष, बबलू, राधेश्याम गर्ग, जतिन शर्मा, सत्यवीर सिंह, मुकेश रूहेला मौजूद रहे।