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लेखपाल भय के वातावरण में कर रहे है काम

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बड़ौत (बागपत)।
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लेखपाल मांगों को लेकर एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी से मिले और उन्हें मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
मंगलवार को लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष सतीश कुमार और बड़ौत तहसील अध्यक्ष सतपाल सिंह के नेतृत्व में एसडीएम से मिले और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। उन्होंने ज्ञापन में बताया कि गत छह माह से शासन एवं राजस्व परिषद द्वारा एंटी भूमाफिया, सीमा जोतक चिह्नों की कोडिंग, कृषक ऋण मोचन, वरासत अभियान, अंश निर्धारण आदि समयबद्ध कार्यक्रम एक ही अवधि में चलाए । इससे लेखपाल कार्य की अधिकता के दबाव एवं तनाव की स्थिति में कार्य कर रहे हैं। कुछ कार्य पिछड़ जाने और त्रुटि पूर्ण हो जाने से अधिकारियों द्वारा उत्पीड़नात्मक कार्रवाई का भय तो बना ही रहता है, साथ ही साथ बैंक एवं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा कृषकों को ऋण मोचन योजना के संबंध में सही जानकारी न देकर भ्रामक सूचनाएं देने के कारण कृषकों की लेखपालों से नाराजगी में वृद्धि हुई है और एंटी भूमाफिया कार्यक्रम तो लेखपालों के लिए एक आपदा का रूप करता जा रहा है। अवैध कब्जों के चिह्नीकरण में आए दिन लेखपालों के साथ मारपीट की घटनाएं होती रहती है। अधिकारियों द्वारा अवैध कब्जेदारों के विरुद्ध एफआईआर भी लेखपालों की ओर से ही कराई जा रही है और अवैध कब्जे हटाने की जिम्मेदारी भी अकेले लेखपाल पर ही डाल दी जाती है। एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन केवल कागजों पर ही सीमित है। धरातल पर समस्त कार्य लेखपाल के द्वारा ही कराया जा रहा है। अलीगढ़, आगरा, चंदौली जनपदों में लेखपालों की हत्याएं कर दी । मारपीट की घटनाएं तो आम बात हो गई है। इससे लेखपालों में भय और आक्रोश का वातावरण है। लेखपालों को कार्य से मुक्त किया जाए और प्रदेश की समस्त तहसीलों में राजस्व पुलिस चौकियां स्थापित कराई जाए, जो उपजिलाधिकारी के निर्देशन में कार्य करें। ज्ञापन देने वालों में अशोक कुमार, बिजेंद्र सिंह तोमर, श्यामपाल, जितेंद्र शर्मा, वंश नारायण यादव, शैलेश, विकास चौधरी, धर्मेंद्र, सहेंद्र, सतवीर, मांगेराम, शशांक आदि रहे।
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