बागपत। सरूरपुर कलां गांव स्थित नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवीसय भक्तामर विधान के 30वें श्री जी का अभिषेक और 48 अघ्य चढ़ाए । विधान निदेशक नमन जैन ने बीते समय को वापस तो नहीं लाया जा सकता है, मगर मूल्यांकन करना आवश्यक है। आने वाले समय में हम उनमें सुधार लाए ऐसा प्रयास तो किया ही जा सकता है। गलती करना बुरी बात नहीं मगर उसे दोहराना अवश्य बुरी बात है। अंधा वो नहीं जिसकी आंखे नहीं अपितु अंधा वो है जिसे अपनी गलती दिखाई नहीं देती है। अपनी गलतियों को न देखना ही अंधापन है और यह अंधापन ही तो हमारे प्रगतिपथ को अवरुद्ध करता है। आओ अपने प्रगति पथ पर निरंतर आगे बढ़ते हुए अपनी गलतियों को न दोहराते हुए और समय के साथ कदम से कदम मिलाते हुए, जीवन को ऊंचाइयों पर ले जाकर एक आदर्श जीवन जीने का संकल्प लें। विधान अदिति जैन ने कराया। लक्ष्य, वैशाली, पूर्ती, मेघा, सिम्मी, शालू, गीता, संतोष, मंजू, अनिता, सपना, जूली, ऊषा, सुव्रत, अदिति, प्रिया जैन मौजूद रहे।