दाहा (बागपत)। नांगल गांव में चल रही भागवत कथा में कथा वाचक साध्वी नीरज शर्मा ने कहा कि सृष्टि के विनाश को रोकने के लिए भगवान को जन्म लेना पड़ता है। कथा के पांचवें दिन कथा के दौरान कहा कि कभी एक अजामिक डाकू हुआ करता था, जिसने जीवन में कभी अच्छे कार्य नहीं किए, बुरे कार्यों में लिप्त रहता था। उनके जीवन में एक संत आए, उसी समय डाकू के एक पुत्र हुआ, जिसका नाम संत के कहने पर उसका नाम नारायण रखा गया। इसी नाम के कारण अजामिक को मुक्ति मिली। भगवान का नाम स्मरण करने से समस्त पाप का नाश होता है। मनुष्य यदि सच्ची भक्ति करें तो वह भगवान का प्रिय बन जाता है। इसमें माम चंद, प्रवीण, वीरेंद्र, नीटू, काला, अभे राम, राहुल, अंकित, सुखपाल, योगेश, महिपाल, नीरज का विशेष सहयोग रहा।