बड़ौत (बागपत)। सुरत्न सागरजी महाराज ने कहा कि जो हमारे अंदर राग की आग जल रही है, उसे शांत करने की प्रतिक्रिया ही वैराग्य भावना है। शनिवार को विहर्ष सभागार में धर्मसभा के चौथे दिन उन्होंने कहा कि जो प्राणी संसार में जन्म लेता है, वह मृत्यु को प्राप्त भी करता है। दुख और सुख को भी भोगता है। इतना सब कुछ करने पर भी जो उसे मिलना चाहिए, वो नहीं मिलता। संसार में सभी जीव सुख चाहते हैं लेकिन दुख से भयभीत रहते हैं। आचार्य प्रवर कहते हैं कि जब तक संकल्प विकल्प जीवन में है तब तक सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती। चार गति होती हैं, नरक, त्रियंच, मनुष्य और देव गति। किसी भी गति में पूर्ण सुख नहीं है। सुख है तो सिर्फ पंचमगति में। अपनी आत्मा में विश्राम करने पर सुख मिलता है। हम सभी सुख की प्राप्ति के लिए प्रयत्न करें। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने संचालन किया।