संविदा कर्मियों के भुगतान में 40 लाख का घोटाला
बागपत, बड़ौत। उर्जा निगम में एक के बाद एक नया घोटाला सामने आ रहा है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम से भुगतान लेने के बाद कर्मचारियों का न तो ईपीएफ (भविष्य कल्याण निधि) जमा किया और ईएसआई (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) की धनराशि जमा की। मानदेय भुगतान भी संविदा कर्मियों को कम किया। शिकायत पर दो ठेकेदारों का भुगतान रोका दिया गया, लेकिन एक अधिकारी उसे जारी कर दिया गया। करीब 40 लाख रुपये का यह घोटाला सामने आने के बाद निगम के एमडी ने मामले की जांच बैठा दी है। निगम के एक डिवीजन में लगभग 250 संविदा कर्मी पिछले कई वर्षों से काम करते आ रहे हैं। इन्हें 10 से 12 हजार रुपये मानदेय के रूप में दिए जा रहे हैं। संविदा कर्मियों को ईपीएफ/ ईएसआई के अलावा अन्य सुविधा भी विभाग के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है।
शामली जनपद के दो ठेकेदार वर्षों जिले में संविदाकर्मी उपलब्ध कराते आ रहे थे। लेकिन न तो संविदा कर्मियों को ईपीएफ/ईएसआई का लाभ दिया गया और न ही न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत भुगतान दिया गया। इसको लेकर संविदा कर्मचारियों ने हंगामा किया था। इसके बाद विभाग में तैनात दो अधिकारियों ने ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया था, लेकिन जैसे ही उक्त दोनों अधिकारियों का जनपद से स्थानांतरण हुआ, वैसे ही उनकी जगह पर तैनाती लेने के बाद आए एक अन्य अधिकारी ने ठेकेदारों का भुगतान जारी करा दिया। 70 लाख में से 40 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। इसकी शिकायत ऊर्जा निगम के एमडी को प्राप्त हुई तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच बैठा दी। इससे पूरे विभाग में खलबली मची हुई है।
दो किस्तों में किया लाखों का भुगतान
बड़ौत। शामली जनपद के दो ठेकेदारों को एक किस्त 17 लाख 50 हजार 772 रुपये का भुगतान किया गया। दूसरी किस्त 21 लाख 80 हजार 500 रुपयों का भुगतान किया।
एमडी को कराया था अवगत
बड़ौत। इस संबंध में एसई रणविजय सिंह का कहना है कि एक व्यक्ति ने पूरे प्रकरण की शिकायत मेरे अलावा एमडी से की थी। जिसके बाद एमडी ने पूरे प्रकरण की जांच बैठा दी है। मै भी अपने स्तर पर जांच कर रहा हू।