अमीनगर सराय (बागपत)। पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन के दौरान जैन संत निर्वाण भूषण महाराज ने कहा कि मानव जीवन अनमोल रत्न है। इसे व्यर्थ गंवाने वाले महा मूर्ख है। स्वाध्याय ही परम तप है। उन्होंने कहा कि आत्म अनुभूति करने पर ही सच्चा आनंद मिलेगा। भगवान की भक्ति की महिला बताते हुए कहा कि इससे जीवात्मा सही मार्ग पर लगकर आत्म कल्याण के मार्ग पर बढ़ती है। उन्होंने स्वाध्याय को आत्म कल्याण का प्रमुख साधन बताया। जैन समाज के अध्यक्ष विनोद जैन बताया कि मुनि श्री 29 जुलाई की वर्षा योग स्थापना समारोह पूर्वक करेंगे। इसमें सुधीर जैन, अशोक जैन, अरूण जैन, राकेश जैन, दिनेश जैन, भूषण जैन, प्रवीण जैन, संदीप जैन, अनिल जैन, शांतिकुमार जैन मौजूद रहे। ब्यूरो