बड़ौत (बागपत)। नवरात्र के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर मां कुष्मांडा देवी की विशेष पूजा की। मंदिरों में पुजारियों ने देवी के स्वरूप पर प्रकाश डाला और मंदिरों में यज्ञ व भजन - कीर्तन हुए। नवरात्र के चौथे दिन भी नगर के पंचवटी मंदिर, पंच मुखी मंदिर, ठाकुरद्वारा शिवालय, पट्टी चौधरान शिवालय, पंजाबी क्वार्टर विश्वकर्मा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा की। रेलवे स्टेशन स्थित वैष्णव मंदिर में सुबह यज्ञ हुआ। पंडित आकाश भारद्वाज ने माता कुष्मांडा की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि मां की कांति और आभा सूर्य के समान है। जब सृष्टि नहीं थी तब देवी के कुष्मांडा स्वरूप ने ही सृष्टि का विस्तार किया। मां का यह स्वरूप अन्नपूर्णा का है। शाकुंभरी रूप धर देवी ने शाक से धरती को पल्लवित किया और शताक्षी बनकर असुरों का संहार किया। यह प्रकृति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री है। कुष्मांडा देवी की आराधना के बिना जप और ध्यान संपूर्ण नहीं होते। इस दौरान मंदिरों में प्रसाद बांटा।