बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरूण मुनि ने कहा आहार जैसा होगा मनुष्य के विचार वैसे ही विचार हो जाते है। जैसा वह पानी पीता है वैसी ही वाणी हो जाती है।
वे ऋषभदेव सभागार में काली सुकाली महाकाली के जप के आयोजन में धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा रसोई का अर्थ होता है जहां रस पकाया जाता है। प्रेम से जो भोजन पकता है, वह स्वादिष्ट बनता है, जहां खाना बनता है, वहां पर जूते-चप्प्ल ले जाना वर्जित है। भोजन बनाते समय बनाने वाले के जैसे विचार होते है, वैसा ही असर खाने में आ जाता है और खाना भी उसके विचारों के साथ दूषित हो जाता है। रविवार को ऋषभदेव सभागार में एक घंटे तक काली सुकाली महाकाली के जाप का उच्चारण किया । एक घंटे तक चली जाप में चार हजार लोगों ने भाग लिया। इसमें सुभाष चंद जैन, वीरसैन, कालू जैन, राजेंद्र जैन, गौरव जैन, जयप्रकाश जैन, डीके जैन, हंस कुमार जैन, विजय जैन, शैलबाला, चांदनी जैन, मेघा जैन, सविता, मधु आदि रहे।