बड़ौत (बागपत)।
अरूण मुनि ने कहा भूल करना भी एक पाप है, मगर उस भूल को दूसरों के ऊपर थोप देना अभ्याख्यान होता है।
जैन स्थानक मंडी में आयोजित धर्मसभा में जैन संत ने कहा तेरहवां पाप है अभ्याख्यान अर्थात किसी पर गलत आरोप लगाना। कुछ पाप राग को तथा कुछ द्वेष को बढ़ाने वाले होते हैं। सारें पाप इन दोनों के अंतर्गत ही आ जाते हैं। सभी की अपनी-अपनी पहचान है। उन्होंने कहा भूल करना भी एक पाप है, मगर उस भूल को दूसरों के ऊपर थोप देना अभ्याख्यान होता है। इसमें व्यक्ति गलती तो मानता है, पर वह स्वयं को पाक षाक रखना चाहता है। आदमी कितना गिर जाता है कि अपना अपराध दूसरों के सिर मढ़ देता है। उन्होंने कहा जो अपराध दूसरों ने नहीं किया। उसका दोष उन पर लगाया गया। उसे अभ्याख्यान कहते हैं। जैन धर्म का लक्ष्य एक ही है कि अपने अंदर मोक्ष की प्यास जगाओ। धर्मसभा में वीर सैन, रमेश, कालू जैन, पप्पू, विजय जैन, चांदनी जैन, इंद्राणी, मेघा जैन, शैलबाला, सविता आदि रहे।