धर्म की शरण लेकर तिर सकता है पापी : अरुण मुनि
बड़ौत (बागपत)। जैन संत अरुण मुनि ने कहा कीचड़ में पैदा होने वाला कमल हमेशा ऊंचा ही रहता है। पाप कर्म करने वाला भी धर्म की शरण लेकर तिर सकता है। जैन स्थानक नया बाजार में आयोजित धर्मसभा में जैन संत ने कहा हम अभी तक संसार में बसे हैं और पाप से बंधे है और चिपके हैं, जब तक पाप से दूर नहीं हटेंगें, तब तक धर्म को स्वीकार नहीं कर सकेंगे। यदि संसार से विमुक्त होना चाहते हो तो पाप से दूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा काम भोग मनुष्य को सुख भी देते हैं और दुख भी देते हैं। सुख तो क्षणिक होता है, लेकिन दुख लंबे समय तक भोगते हैं। इस पाप का आकर्षण आयु विशेष से संबधित नहीं होते। यह वासना तो किसी भी उम्र में जागृत हो सकती है। इससे पूर्व अमन मुनि ने भी धर्मसभा में विचार रखे। धर्मसभा में जयप्रकाश जैन, प्रवीण जैन, खचेडुमल, विनोद जैन, अभय जैन, अनुराग जैन, मुकेश जैन, हंस कुमार, कालू जैन, दीपक जैन, शैल बाला, इंद्राणी, सविता, मधु, छवि, पूनम आदि रहे।