बड़ौत (बागपत)। कथा व्यास पं. पवन शास्त्री ने कहा कि तृष्णा को त्यागकर मन को हरि के चरणों से जोड़ना चाहिए। वे बुधवार को ठाकुरद्वारा मंदिर मेें भागवत कथा के दूसरे दिन बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य को काम, क्रोध, लोभ, अहंकार त्यागकर हृदय में सांसारिक जीवों के प्रति प्रेम रखना चाहिए, यही मानव जीवन की सार्थकता है। कथा में राजा परिचित के जन्म की कथा, विदुर की कथा का वर्णन किया। कथा में मंदिर के प्रधान बाबूराम, सतेंद्र कौशिक, लीलू, घनश्याम, डा. सत्यप्रकाश वशिष्ठ, शिव कुमार, मुकेश, बिजेंद्र, हरि मोहन अग्रवाल, उर्मिला देवी, माया देवी, सरोज अरोरा, राजकली, रामवती शामिल रहे।