अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। अग्रवाल धर्मशाला में श्रीराम कथा सुनाते हुए पंडित राकेश उपाध्याय ने कहा कि भरत ने सिर पर खड़ाऊं रखकर संसार को बताया कि बड़े भाई की आज्ञा सिरोधारक करनी चाहिए। भरत चरित्र तो सुनते है, गीत भी गाते है, सुनते-सुनाते, रोते भी है और आंसू भी बहाते हैं, नतीजा फिर वही का वही है। कारण हम अपने जीवन में लोभ, मोह की रस्सी में बंधे है। आवश्यकता है जीवन में त्याग की, राम राज्य का मतलब है, अंतर मन राम सुखी होना और यह अनुभव त्याग के बिना नहीं है। रामकथा में अध्यक्ष प्रेम शंकर शर्मा, मुकेश वर्मा, दिनेश वर्मा, सुभाष सक्सेना, राकेश सक्सेना, बबलू, राधेश्याम गर्ग, नीरे, नरेश कुमार, जतिन शर्मा, आंसु शर्मा मौजूद रहे।