बड़ौत (बागपत)। रेलवे रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में यज्ञ किया , जिसमें काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुतियां दी। यज्ञ में ओमवीर सिंह आर्य ने कहा कि व्यवहार के दृष्टिकोण में गृहस्थ आश्रम सर्वश्रेष्ठ है। जिस प्रकार 25 वर्ष तक मनुष्य ब्रह्मचर्य का पालन कर ज्ञान पाकर विद्वान बनता है और जीवन की प्रथम नींव को मजबूत करता है, उसी प्रकार गृहस्थ आश्रम व व्यवहार के दृष्टिकोण से सर्वोत्तम माना गया है। गृहस्थ को विशेष विद्वान अतिथि के आगमन पर आसन, निवास, भोजन, जल और समीप बैठना आदि सत्कार करना चाहिए। किंतु पाखंडी वेद निंदक, नास्तिक आदि से युक्त अतिथि का वचन मात्र से भी सत्कार गृहस्थ को कभी नहीं करना चाहिए। यज्ञ के बह्मा मित्र मुनि, यज्ञ मान रणतेज बहादुर रहे। इसमें नितिन, राजेंद्र कुमार, जयप्रकाश, अरुणा, विनोद भारद्वाज, अरुण, रामबली राणा, ओमपाल राठी, राधेश्याम, सुखपाल आदि रहे।