अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। मौलवी हाजी जहीर अहमद ने कहा कि अल्लाह हर रोजे का अलग-अलग शबाब फरमाते हैं। बीसवें रोजे की रात को अल्लाह रोजेदार के लिए जन्नत फिरदौस में एक नूर का महल तैयार करते हैं। इक्कीसवें रोजे को मैदान हशर के तमाम गम से बरी फरमा देते हैं। बाईसवीं रात को इसकी चौबीस दुआएं कबूल होती है। इसलिए हमें रमजान मुबारक माह में रोजे रखने चाहिए। नमाज और तराबीहे पढ़कर अल्लाह से अपने पिछले गुनाहों को माफ करा लें।