खेकड़ा (बागपत)। लोक साहित्य संस्कृति समिति के स्थानीय कार्यालय में सेना दिवस पर मंगलवार को काव्य गोष्ठी हुई। इसका शुभारंभ गजेंद्र गजानन ने दीप प्रज्वलन कर किया। कवि अजय कुमार ने कहा कि अब भारत के राष्ट्र हित का शंखनाद कर रहे सैनिक वीर, मत दो उसे न हिंदू राष्ट्र की तुमको जो न बंधावे धीर। कवि गजेंद्र कौशिक गजानन ने कहा कि शांति के दूत कपोत पक्षी अब तो पंख पसार गए, हुए आतंकित दानवों में जीवन से छुटकारा पा रहे। अब ये जीना भी क्या जीना है, इससे अच्छा मरना है, क्यों नहीं मार कर मरें, नव जीवन ही अच्छा है। कवि शैलेंद्र कुमार ने कहा कि जो लगाए पौधे वो पेड़ हो गए, जिनको समझा न शेर वो शमशेर हो गए। कवि राकेश कुमार ने कहा कि समय नहीं ये वाद विवाद का, सफाया करो अब उग्रवाद का। कवि मुकेश कुमार ने कहा, हथियार लेकर दुश्मन ताक में बैठा उधर, और हम तैयार हैं सीना लिए इधर, खून से खेलेंगे होली, अगर वतन मुश्किल में है, सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं। कवि ओमप्रकाश ने कहा कि देशद्रोही देश में धन होता विदेश में, क्यों होते हैं ऐसे काम बचा लो अपना हिंदुस्तान। इसके अलावा कई कवियों ने भी कविताएं पढ़ी।