बागपत। दसलक्षण पर्व में छठे दिन उत्तम संयम धर्म की पूजा की गई। पूजन में धूप दशमी के मौके पर विशेष रूप से भगवान शीतलनाथ की पूजा की गई। विधान में 216 अर्ध्य मंडलों पर अर्पित किए गए। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में बुधवार को दसलक्षण पर्व को मौके पर मूलनायक भगवान श्री 1008 अजितनाथ, नेमिनाथ, शांतिनाथ, पार्श्वनाथ का मंत्रोचारण से अभिषेक किया गया। शांतिधारा मोहित जैन ने कराई। नित्य नियम पूजन में देवशास्त्र, गुरु पार्श्वनाथ भगवान और दसलक्षण धर्म पूजन में उत्तम संयम धर्म की पूजा की गई। विधान में पूजन के बाद 216 अर्ध्य मंडलों पर समर्पित किए गए। पं. अशोक शास्त्री ने कहा कि आज के इंसान में संयम की भावना बहुत कम हो गई है। यदि मनुष्य अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर ले तो उसके जीवन में कष्ट नहीं आ सकता। धूप दशमी पर्व पर मयंक जैन ने कहा कि कहा कि जिस प्रकार दूध को उबाले पर उसके अंदर का पानी जलाता है, उसी प्रकार अग्नि में धूप खेने से हमारा अष्टकर्म भी धूप के साथ जल जाते हैं और मन को शीतल कर जाता है। सामूहिक आरती के बाद अष्ट कुमारियों द्वारा तीर्थंकर माता से अपनी जिज्ञासा का समाधान करने और उनकी सेवा करना के बारे में लघु नाटिका प्रस्तत की गई। इस दौरान अतुल जैन, मयंक जैन, विकास जैन, मोहित जैन, पुनीत जैन, नमन जैन, नीलम जैन, प्रिया, कामिनी, प्रमोद जैन, आनंद जेन, शिखरचंद जैन, सुधीर जैन, अंतिमा, आस्था, नेहा, सुनील, नमन मौजूद रहे।