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लाड़ला था घर की जान
हो गया फर्ज पर कुर्बान
जिंदगी फिर हार गई देखो
फिर जीत गई मौत बेईमान
मां के आंसुओं को कौन समझाएं
हो गया पिता का आंगन वीरान
छोटा भाई किसे कहेगा अपना
जिसका लुट गया सारा जहान
काल से पूछ रहे हैं विधवा के आंसू
मेरे शरीर में ही क्यों छोड़ दिए प्राण
बिटिया सोचती है, पापा फिर आएंगे
उसकी जिद क्या जाने शहादत, क्या जाने बलिदान
मुखाग्नि देकर घर लौट आया है मासूम बेटा
कंधों पर बैठाकर अब उसे कौन दिखाएगा आसमान
प्रस्तुति --मदन बालियान