बड़ौत (बागपत)। कथा व्यास पं. पवन शास्त्री ने कहा कि कोई कुलसित व्यक्ति भी यदि सत्संग का आसरा लेता है तो वह भी जीवन को सफल बना सकता है।
ठाकुरद्वारा मंदिर मेें श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन उन्होंने कहा कि मानव के पास रूप, धन, ऐश्वर्य, ऊंचा पद है लेकिन विवेक नहीं है, ऐसे व्यक्ति का जीवन शीघ्र ही नष्ट हो जाता है। इसलिए मानव के अंदर विवेक का होना आवश्यक है। वह विवेक जीव सत्संग से प्राप्त कर सकता है। कथा में बाबूराम मिश्रा, पं. घनश्याम शर्मा, बिजेन्द्र शर्मा, हरीश मोहन, राज गोपाल, मुकेश वर्मा, दिनेश, अनिल, सत्येंद्र, देवदत्त, उमेश दत्त आदि शामिल रहे।