बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा आज नारी ही नारी की दुशमन बनी है और वह नारी जाति को मिटा रही है।
रविवार को जैन स्थानकवासी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा नारी को आदिकाल से ही गौरव और सम्मान मिला हुआ है। सारा भारत इनका सम्मान करता है। श्रवण संस्कृति के अनुसार आज नारी किसी से भी कम नहीं है। वह मनुष्य के बराबर है। उन्होंने कहा जब राम की आज्ञा से लक्ष्मण सीता को वनों में छोड़ने गए और रथ से नीचे उतरकर सीता से कहा भाभी राम के लिए कोई संदेश दे दो, तब सीता ने कहा मै अगले जन्म में भी राम जैसा पति मिले पाने की कामना करती हूं। उन्होंने कहा नारी तो ऐसी शक्ति का नाम है जो कटीली झाड़ी में भी फूल खिला देती है। दरिद्रता से भी भरे घर को स्वर्ग सामान बना देती है। यदि पुरुष में नारीत्व आज जाए तो भगवान बन जाए। यदि नारी में पुरुष तत्व आ जाए तो पिशाचनी बन जाती है। नारी तो इतनी बड़ी शक्ति है जो सारे विश्व को अपने आंचल में समा लेती है। जितने भी महापुरुष, तीर्थकर हुए हैं, उन सबकी जन्मात्री नारी ही तो है। धर्मसभा में आगम मुनि ने भी विचार रखे। इसमें पूनम, मधु, चित्रा, भावना, अमित राय जैन, विनोद जैन, धर्म प्रकाश, अतुल, हंस कुमार, दीपक, शैल बाला, इंद्राणी आदि रहे।