बड़ौत (बागपत)।
आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा एक सच्चा श्रावक सबके प्रति सद्भावना व्यक्त करता है और आत्मा के उत्थान का मार्ग अपनाता है।
विहर्ष सभागार में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा संसार से तिरने के दो मार्ग है। एक है साधना का मार्ग और दूसरा उपासना का मार्ग है। साधना का मार्ग उन जीवों के लिए है, जो संसार से दुखी हो गए हैं। जो संसार में पर वस्तु को अपना समझते हैं। ऐसे जीवों के लिए उपासना का मार्ग है। व्यवहार में सबको देखते हो। व्यवहार के लिए देव शास्त्र की पूजा करते हो। आप आत्मा की निर्मलता के लिए नहीं। दिखाने के लिए व्यवहार की क्रिया कर रहे हो। जब तक व्यवहार नहीं दिखेगा, आप धर्मात्मा नहीं कहला सकते। व्यवहार ऐसा मत बनाओ की दुनिया हमें बुलाएगी तो पूजा करेंगे। बहुत बार ऐसा होता है कि जीवन भर दान दिया, सेवा की, अंत समय ऐसा आया शरीर एक कदम चलने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा संसार का मार्ग हो या मोक्ष का मार्ग हो, व्यवहार अच्छा करना पड़ेगा। धर्मसभा में मदनलाल, प्रमोद, अशोक, वरदान, शशि, सुख दर्शन, राजेश आदि रहे।