बड़ौत (बागपत)। जैन संत अरुण मुनि ने कहा अरिहंत की आराधना से जीवन में बड़े मोड़ आते हैं। सोमवार को जैन स्थानक नई मंडी में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा भले ही हमने अरिहंत के दर्शन न किए हो, लेकिन उनकी छोटी से छोटी साधना भी मनुष्य के जीवन में चमत्कार कर देती है। उन्होंने कहा हर मनुष्य को आत्मचिंतन करने से सम्यक की प्राप्ति होती है। जब व्यक्ति मुंह पर पट्टी लगाता है और हाथ में माला लेता है और इससे पूर्व अपने मन को स्थिर करें, तभी शांति मिल सकती है। मन, वचन और काया तीनों प्रकार से धर्म की आराधना की जाति है। काया से जितना धर्म क्रिया की जाती है। उससे अधिक वाणी से और सबको अधिक मन से क्रिया की जाति है। इससे पूर्व मनीष मुनि ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। इसमें बाबूराम, देवेंद्र, सुरेंद्र जैन, हंस कुमार जैन, हरीशचंद्र, दीपक जैन, सुरेश चंद, अमित राय जैन, आशीष जैन, अजय जैन, अनिल जैन, शैल बाला, अनुराधा, रश्मि, मोनिका आदि रहे।