बिनौली (बागपत)। धनौरा सिल्वरनगर के शिव मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को महामंडलेश्वर श्री भैया दास जी महाराज की धर्म पुत्री बाल साध्वी राधा देवी ने कथा सुनाते हुए कहा कि मनुष्य अगर अपना कल्याण चाहता है तो उसे निश्चित लोभ का त्याग और सेवा को धारण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि त्याग और सेवा से जीव का उद्धार होता है। लोभ सब दुखों की जड़ है, लोभ ही प्रेम समाप्त करता है, और जीवन में अशांति पैदा करता है। इसलिए सबसे पहले लोभ का ही त्याग करना चाहिए। सेवा के द्वारा आज जगत में हनुमान जी पूजा जा रहे हैं। हनुमान जी ने राम जी की सेवा करते हुए कभी किसी पद की इच्छा नहीं रखी, केवल त्याग तपस्या से भगवान नाम जपते रहे यानी कि राम जी की सेवा करते रहे। भगवान राम भी कहते हैं परहित बस जिनके मन माही तीन कहूं जग दुर्लभ कछु नाहीं। जिनके हृदय में परोपकार बसता है, उनके लिए जगत में कुछ भी असंभव नहीं है। जो परोपकार की भावना से काम करते हैं यानी जो सेवा भाव को अपने जीवन में उतार लेते हैं, उनका कल्याण हो जाता है।