बड़ौत (बागपत)। पिछले कई माह से आकर्षण का केंद्र बने रहे सिनौली के उत्खनन केंद्र पर बुधवार को सन्नाटा पसरा रहा। यहां से निकला रथ और ताबू को दिल्ली भिजवा दिया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) एवं पुरातत्व सर्वेक्षण लाल किला के संयुक्त तत्वावधान में सिनौली में चले उत्खनन कार्य की समाप्ति के बाद ट्रेंच को ढक दिया गया है। सिनौली में उत्खनन में मिले रथ, ताबूत और अन्य सामग्री दिल्ली स्थित लाल किला के म्यूजियम में भिजवाई जा चुकी है। यहां से निकला सामान दिल्ली चले जाने से बुधवार को सिनौली में सन्नाटा पसरा रहा। उत्खनन स्थल को हालांकि पन्नियों से ढका गया है। क्षेत्र के लोगों ने पुरातत्व विभाग से मांग रखी है कि दोबारा खुदाई होनी चाहिए। सिनौली निवासी दीपक कुमार, सौरभ कुमार और अवनीश का कहना है कि सिनौली में एतिहासिक प्रमाण मिले हैं, इसलिए खुदाई चलती रहनी चाहिए। गौरतलब है कि इससे पहले 2005 में सिनौली उत्खनन ने संपूर्ण विश्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। हड्प्पाकालीन शवाधान केंद्र यहां मिला था।