राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस एक अक्तूबर को अमर उजाला फाउंडेशन व स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मंडलीय जिला चिकित्सालय स्थित परिसर के ब्लड बैंक व जिला महिला अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक लगने वाले शिविर में लोग स्वेच्छा से रक्तदान करेंगे। इसमें व्यापारी, सामाजिक संगठन और आमजन हिस्सा लेंगे।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आइएन तिवारी ने कहा कि रक्त की एक बूंद भी कृत्रिम रूप से बनाई नहीं जाती है। आवश्यकता पड़ने पर एक इंसान ही दूसरे इंसान को रक्त देकर जान बचाता है। इसलिए इस महादान में हर स्वस्थ व्यक्ति को योगदान करना चाहिए। जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विनय कुमार ने कहा कि अभी भी लोगों में यह भ्रांति है कि रक्तदान करने से कमजोरी आती है। जबकि सही बात यह है कि रक्तदान करने से पहले व्यक्ति के स्वास्थ्य की संपूर्ण जांच हो जाती है। रक्तदान करने से किसी प्रकार की कमजोरी नहीं होती। कहा कि स्वस्थ महसूस करने वाला इंसान रक्तदान कर सकता है। बताया कि गर्भवती महिला, जल्द ही टैटू बनवाने वाला व्यक्ति या हीमोग्लाेबिन 12.5 ग्राम से कम है तो ऐसे लोग रक्तदान नहीं कर सकते हैं।
0000000000000
रक्तदान के बारे में यह भी जानें
आजमगढ़। एक यूनिट में 350 मिलीग्राम खून निकाला जाता है। रक्तदान के बाद खून की कमी 24 घंटे में पूरी हो जाती है। एक यूनिट खून से एक यूनिट प्लाज्मा, एक यूनिट प्लेटलेट्स, एक यूनिट आरबीसी और एक यूनिट क्रायो मिलता है। इन चारों से अलग-अलग चार लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। तीन महीने के अंतराल पर ही दोबारा रक्तदान करना चाहिए। रक्तदाता की उम्र 18 से 65 साल के बीच व शरीर का वजन न्यूनतम 45 किलो होना चाहिए।